उत्तर प्रदेश

इटावा में 36 साल की महिला 10 साल से ले रही थी वृद्धावस्था पेंशन, विभागीय सत्यापन पर उठे सवाल

इटावा में 36 वर्षीय महिला के करीब 10 साल तक वृद्धावस्था पेंशन लेने का मामला सामने आया। सत्यापन में अपात्र पाए जाने पर पेंशन रोकी गई, जिससे विभागीय जांच पर सवाल उठे।

Itawa News: इटावा के बढ़पुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत विचारपुर में 36 वर्षीय महिला के करीब 10 वर्षों से वृद्धावस्था पेंशन लेने का मामला सामने आया है। महिला की पहचान उमा देवी पत्नी शिवराज सिंह के रूप में हुई है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि की शिकायत के बाद समाज कल्याण विभाग ने वर्ष 2024-25 के वार्षिक सत्यापन में महिला को अपात्र मानते हुए उसकी पेंशन रोक दी। मामले ने विभागीय सत्यापन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

ग्राम पंचायत विचारपुर के प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार ने महिला के अपात्र होने की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी के माध्यम से जिला समाज कल्याण अधिकारी को लिखित शिकायत दी थी। समाज कल्याण विभाग ने 13 अगस्त 2026 को शिकायत का जवाब देते हुए बताया कि वार्षिक सत्यापन में सचिव की रिपोर्ट के आधार पर उमा देवी को अपात्र पाया गया। इसके बाद उनकी वृद्धावस्था पेंशन रोक दी गई।

रिकवरी को लेकर उठे सवाल

प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार का कहना है कि महिला को करीब 10 वर्षों तक वृद्धावस्था पेंशन मिलती रही, लेकिन शिकायत के बाद विभाग ने केवल पेंशन बंद करने की कार्रवाई की। उनका आरोप है कि अब तक महिला को कथित रूप से अपात्र रहते हुए प्राप्त की गई पेंशन की धनराशि वापस करने के संबंध में कोई रिकवरी नोटिस या आदेश नहीं दिया गया है।

विभागीय सत्यापन पर सवाल

वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ पात्र बुजुर्गों को जीवनयापन में आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से दिया जाता है। ऐसे में 36 वर्षीय महिला को वर्षों तक इस योजना का लाभ मिलना विभागीय सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी है कि पेंशन स्वीकृत होने के बाद लगातार होने वाले वार्षिक सत्यापन में महिला की उम्र और पात्रता की जांच किस स्तर पर हुई।

जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

मामले में महिला ने किन दस्तावेजों के आधार पर वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त की और करीब 10 वर्षों तक उसका सत्यापन किस स्तर पर किया गया, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। वहीं, यदि जांच में सरकारी धन का अपात्र व्यक्ति को भुगतान सामने आता है तो जिम्मेदारी तय करने और सरकारी धन की वसूली की कार्रवाई भी अहम होगी।

पात्रों को लाभ मिलने पर सवाल

इस प्रकरण के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि एक अपात्र महिला को करीब एक दशक तक पेंशन मिलती रही तो जिले में ऐसे अन्य मामले तो नहीं हैं। पात्र बुजुर्गों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए होने वाले सत्यापन की प्रभावशीलता पर भी अब सवाल उठ रहे हैं। मामले की जांच के बाद ही विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय होने की स्थिति स्पष्ट होगी। इस मामले पर जिला समाज कल्याण संध्या रानी बघेल मीडिया के कैमरे पर बात करने से इनकार कर रही है।

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